😠 "ख़ुद आवाज उठा "😠Poem by Juhi Kumari

 

😠 "ख़ुद आवाज उठा "😠

बेकसी छोड़, तलवार उठा ।
लूटा है जिसने तेरी आबरू को,
उसके जिस्म के टुकड़े - टुकड़े
काट गिरा।
न मिलने वाला है तुझे इंसाफ़ यहाँ,
अब तू "खुद आवाज उठा"।।

नोंचकर एक मासूम को वो दरिंदा आजाद है,
ये नाकाबिल समाज, ये सरकार भी चुपचाप है।
एक लड़की नहीं, सारी नारी शक्ति का फिर से यह अपमान है
इस अंधे कानून से न मिलेगा इंसाफ़ कभी,
आओ नारियों महाशक्ति दुर्गा का
अवतार लो ।
थूककर इस कानून को, इन दरिदोंं को मार गिरा
बहुत हो गया अब अन्याय नारी पर,
कदम आगे बढ़ा, तलवार उठा
चल नारी अपने सम्मान केलिए अब,
"😠 खुद़ आवाज उठा😠

.... जुही मिश्रा...


Web Title: juhi kumari


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