'विश्व गुरु' बनने के लिए भारत को बनना ही होगा 'विश्व शक्ति'

  • आज भारतवंशियों के पास हर क्षेत्र में कई-कई पेटेंट हैं, जो हमारी ताकत का एहसास कराते हैं. 
  • भारत जैसे मजबूत राष्ट्र की संप्रभुता को विदेशी कंपनियाँ, मनमाने ढंग से, जब चाहे तब, चुनौती दे सकती हैं
  • कहीं ऐसा तो नहीं है कि विश्व गुरु का सपना सजाये, हमारी आंखें जब खुलेंगी, तब तक हम डिजिटल उपनिवेशवाद (Digital Colonialism) के शिकार हो जायेंगे?


लेखक: गौरव त्रिपाठी, संस्थापक-सीईओ, वयम् ऐप 
Published on 10 Sep. 2021 (Update: 10 Sep. 2021, 8:12 PM IST)

कहते हैं अतीत का गौरव वर्तमान की थाती होता है, तो भविष्य की ओर बढ़ते कदम को मजबूत करने वाला मार्गदर्शक भी!

भारत का गौरवशाली अतीत, आखिर किस राष्ट्रभक्त के रोंगटे नहीं खड़े कर देता होगा?

विश्व गुरु की उपाधि धारण करने वाला हमारा महान राष्ट्र ‘भारत’ आज एक बार फिर उसी दिशा में कदम बढ़ा चुका है, और वर्तमान राजनीतिक - सामाजिक नेतृत्व में ‘समरसता’ के विचारों को साथ लिए, एक-एक करके हम उन शिखर बिंदुओं को छूते चले जा रहे हैं, जो अंततः हमें विश्व गुरु के महान पद पर प्रतिष्ठित करने में सहायक सिद्ध होंगे.

अतीत को ध्यान में रखते हुए, जब हम वर्तमान की ओर देखते हैं, तो प्राचीन समय से ही, योग के माध्यम से हमने संतुलित जीवन शैली विकसित की थी, और आज के समय में भी भारतीय प्रयासों के फलस्वरूप योग को समस्त दुनिया द्वारा स्वीकार कर लिया गया है.

चिकित्सा के क्षेत्र में भी हम काफी आगे हैं, और कोरोना के दौर में जिस तरीके से भारत ने विश्व की बड़ी आबादी होने के बावजूद, लोगों को वैक्सीनेट किया, वह अपने आप में अद्भुत माना जा रहा है.

गणित-विज्ञान के साथ ज्योतिष और संस्कृत भाषा की महिमा को पुनः प्रतिष्ठित किया जा रहा है, तो अन्तरिक्ष के क्षेत्र में मंगल यान, जीएसएलवी मार्क 2 जैसे आविष्कारों से हम पुनः उसी दिशा में चलाएमान हो रहे हैं, जहाँ गौरवशाली भविष्य हमारी प्रतीक्षा कर रहा है..

आर्मी की बात करें तो भारतीय सेना विश्व की चार बड़ी सेनाओं में पहले ही शुमार है, और वह चाहे चीन हो चाहे पाकिस्तान, भारतीय सेना जिस बहादुरी से सीमाओं की रक्षा करती है, उससे यह देश भारत की तरफ तिरछी आंख करने से ही थर्रा जाते हैं. समुद्र में अपनी मजबूती दिखलाना हो, विदेशी धरती पर एयर स्ट्राइक करना हो या पहाड़ में दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देते हुए यथास्थिति बरकरार रखनी हो,  हमारी सेनायें हर जगह सक्षम साबित हुई हैं.

30 सितम्बर 2021, शाम 5.30 से डिजिटल उपनिवेशवाद (Digital Colonialism) पर होने वाली 'राष्ट्रीय परिचर्चा' में भाग लें.

भारतीय अर्थव्यवस्था एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तो है ही, इसके साथ विश्व में भी छठें स्थान पर काबिज है, और यह लगातार ऊपर की ओर बढ़ती जा रही है. वैसे पीपीपी (Purchasing power parities) की बात करें तो विश्व भर में भारत की इकॉनमी तीसरे स्थान पर आती है.

और भी ऐसे कई कारण हैं, जिससे माना जा सकता है कि नए जमाने का भारत अपने मजबूत कदम से विश्व गुरु बनने की दिशा में अग्रसर है.

इन तमाम बिंदुओं के साथ-साथ हमें कुछ ऐसे क्षेत्र भी चिन्हित करने हैं, जिसमें एक छत्र प्रदर्शन से आने वाले दिनों में भारत को विश्व शक्ति की पदवी निर्विवाद रूप से हासिल हो सकेगी.

आईटी अर्थात इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी भी इन चिन्हित क्षेत्रों में से एक है.

आज के समय में भारतीय टेक एक्सपर्ट्स, तमाम देशों में एक से बढ़कर एक टेक्नोलॉजी विकसित करने में लगे हैं, तो एप्लीकेशन से लेकर दूसरी तकनीक तक में बेहतरीन समझ बनाने में सफल साबित हुए हैं.

आज भारतवंशियों के पास हर क्षेत्र में कई-कई पेटेंट हैं, जो हमारी ताकत का एहसास कराते हैं. 

इस कड़ी में टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स की जब बात आती है, तो कहीं ना कहीं विश्व शक्ति की ओर बढ़ते हमारे मजबूत कदमों को ठिठकना ना पड़ जाता है.

बीते दिनों हमने देखा कि किस प्रकार भारत सरकार ने जब व्हाट्सएप, टि्वटर जैसी विदेशी कंपनियों हेतु जवाबदेही तय करने के लिए कानून बनाया, तो वह टालमटोल करने लगीं. यह मामला काफी समय तक मीडिया में छाया रहा.

बेशक इसे कोई छोटा मुद्दा माने, किंतु सवा सौ करोड़ से अधिक भारतीय नागरिकों के लिए यह चिंतित करने वाली बात थी. आखिर चुनी हुई सरकार का आदेश मानने में विदेशी कंपनियां भला किस प्रकार आनाकानी कर सकती हैं?

भारत जैसे राष्ट्र की संप्रभुता को विदेशी कंपनियाँ, मनमाने ढंग से, जब चाहे तब, चुनौती दे सकती हैं, यह बड़ा साफ़-साफ़ दिखा!
निश्चित रूप से डाटा संप्रुभता (Data Sovereignty) में हमारे महान देश को आँख दिखाई जा रही है.

आप अगर ध्यान से देखें तो आप समझ पाएंगे कि भारत में सक्रिय तमाम कंपनियों में से विदेशी कंपनियों का कब्जा बेहद मजबूती से जमा हुआ है.

टॉप 10 एप्लीकेशंस में आप देखेंगे तो विदेशी कंपनियां ही नजर आएंगी.

ऐसे में यह सोचना कहीं से भी नाजायज नहीं लगता है कि कहीं हम डिजिटल उपनिवेशवाद (Digital Colonialism) की तरफ तो नहीं बढ़ रहे हैं?

जिस प्रकार ईस्ट इंडिया कंपनी के माध्यम से विदेशी लोग भारत में आए, और सामने से तो वह वह सिर्फ व्यापार करने के उद्देश्य से आये, किंतु जल्द ही उस विदेशी कंपनी ने पूरे देश पर कब्जा जमा लिया!

East India Company / British India Map (Pic credit: Dreamstime)

कहीं ऐसा तो नहीं है कि विश्व गुरु का सपना सजाये, हमारी आंखें जब खुलेंगी, तब तक हम डिजिटल उपनिवेशवाद (Digital Colonialism) के शिकार हो जायेंगे?

यह प्रश्न बिल्कुल वाजिब है!

हम भारतीयों का तमाम डाटा विदेशी सर्वर्स पर आज भी स्टोर होता है, यह बेहद चिंता की बात है.

एक क्षेत्रीय महाशक्ति होने के बावजूद भी विश्व शक्ति के तमगे से हमें यह बातें दूर करती हैं कि टेक्नोलॉजी में हमारे प्लेटफार्म आखिर कितने हैं?

वीडियो कम्युनिकेशन जैसी सर्विसेज में ज़ूम जैसा कोई एप्लीकेशन आता है, और रातों रात वह भारतीयों के मस्तिष्क पर छा जाता है, तो ऐसे में हमें रूककर सोचने की ज़रुरत है कि डिजिटल उपनिवेशवाद का खतरा कितना वास्तविक है, कितना वृहद् है!

जाहिर तौर पर इसके लिए हमें वयम् जैसे कई एप्लीकेशन की जरूरत पड़ेगी, जो ना केवल वीडियो कम्युनिकेशन में, बल्कि दूसरे तमाम टेक प्लेटफॉर्म्स के लिए भी एक मजबूत विकल्प प्रदान करें.

भविष्य की ‘विश्व शक्ति’ बनने के लिए मेड इन इंडिया, मेड बाय इंडिया एंड मेड फॉर इंडिया (भारत में बने, भारतीयों द्वारा बने एवं भारत के लिए बने ऐप्स ) जैसी जरूरतों पर खरा उतरने वाले टेक प्लेटफॉर्म्स / ऐप्स की ज़रुरत बढ़ने वाली है. 

इस तरह से ही हम डिजिटल उपनिवेशवाद के खतरों को भी कम कर सकेंगे!

यही वह प्रयास है, यही वह डिजिटल सवाधानी है, जो हमें विश्व शक्ति (World Power) के मुकाम की ओर ले जाएगी, एवं अंततः हम विश्व गुरु (Vishwa Guru) के पद पर प्रतिष्ठित हो सकेंगे, सुशोभित हों सकेंगे!


आप इस संबंध में क्या सोचते हैं, कमेंट बॉक्स में अपने विचार जरूर बताएं.

- Gaurav Tripathi
Founder & CEO, Superpro.ai, Vayam App

Web Title: Digital Colonialism Article by Gaurav Tripathi, Founder CEO, Superpro, Vayam App, To become a Vishwa guru, India must become a world power, Hindi Article

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परिचर्चा का विषय: डिजिटल उपनिवेशवाद - Digital Colonialism
परिचर्चा का लिंक:
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